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Tue. Apr 16th, 2024

अंतरिक्ष में भारत का परचम,जानें  कौन वो है ‘गगनवीर’ जो अंतरिक्ष में लहराएंगे देश का परचम

Indian Gaganyaan Astronauts: भारत अंतरिक्ष की दुनिया की उभरती हुई नई महाशक्ति है. .अंतरिक्ष में हम नई-नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं. इसी कड़ी में अब बारी है गगनयान मिशन की. इस मिशन के तहत 4 भारतीय अंतरिक्ष की सैर करेंगे और भारत का परचम लहराएंगे.

भारत विश्व की सबसे बड़ी महाशक्तियों में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है. इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है. जमीन से लेकर आसमान तक इंडिया अपना करतब दिखाता आ रहा है. अंतरिक्ष की दुनिया में भारत इतिहास रचता आ रहा है. गगनयान मिशन के तहत 4 भारतीय एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष की सैर करेंगे. ये सिर्फ खबर मात्रा ही नहीं बल्कि भारत के विकास की नई गाथा भी. आज उन चारों एस्ट्रोनॉट्स के नाम का ऐलान पीएम मोदी ने कर दिया है. भारत के गगनवीरों को कड़ी ट्रेनिंग दी गई है. पिछले साल इस स्पेस मिशन की सफल टेस्टिंग भी की जा चुकी है. इन चारों भारतीयो का राकेश शर्मा से गहरा कनेक्शन हैं.

4 भारतीय पृथ्वी की लोअर आर्बिट में जाकर भारत का दमखम दिखाएंगे. यह भारत का पहला स्पेस मिशन होगा जिसमें चार भारतीय उड़ान भरेंगे. पीएम मोदी ने चारों एस्ट्रोनॉट्स की घोषणा केरल के तिरुवनंतपुरम स्थिति विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (Vikram Sarabhai Space Centre) पर विजिटिंग के दौरान की.

ये हैं भारत के 4 गगनवीर

गगनयान मिशन में एस्ट्रोनॉट्स के रूप में ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन और शुभांशु शुक्ला सिलेक्ट हुए हैं. ये सभी भारतीय एयरफोर्स में या तो विंग कमांडर हैं या फिर ग्रुप कैप्टन हैं. सभी को पायलट के रूप में काम करने का अच्छा खासा अनुभव है. इसका मतलब है कि ये चारो योद्धा हर परिस्थिति में सर्वाइव करने के लिए बिल्कुल रेडी हैं. इन्हें कड़ी ट्रेनिंग दी गई है.

पीएम ने एक्स पर दी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- “यह मेरे लिए बहुत ही स्पेशल मूमेंट है कि मैंने भारत के चारों अंतरिक्ष यात्रियों को विंग सौंपा. वे 140 करोड़ भारतीयों की आशाओं, आकांक्षाओं और आशावाद को दर्शाते हैं. भारत को ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्ण नायर, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला पर गर्व है.”

राकेश शर्मा से गगनवीरों का है ये कनेक्शन

इसरो ने कई राउंड के बाद ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला को गगनयान मिशन के लिए चुना गया. इन सभी की ट्रेनिंग रसिया में हुई है.  रसिया के यूरी गागरिन अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र (Yuri Gagarin Cosmonaut Training Center) ने सभी को 1 साल की कड़ी ट्रेनिंग दी है. अमेरिका ने भी चारों भारतीयों को स्पेस मिशन के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी है.  रसिया स्पेस मिशन के लिए  ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है. अधिकतर एस्ट्रोनॉट्स को यहीं ट्रेनिंग दी जाती है.  टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1984 में राकेश शर्मा ने भी यहीं से ट्रेनिंग ली थी. राकेश शर्मा भारतीय वायुसेना के वायुसेना के पायलट थे जिन्होंने  Soviet Interkosmos Programme के तहत Soyuz T-11 से 3 अप्रैल 1984 अंतरिक्ष की उड़ान भरी थी. वह पहले भारतीय है जिन्होंने स्पेश की यात्रा की है. 

अंतरिक्ष में भारत का परचम

गगनयान मिशन 2024 -25 में लॉन्च के लिए शेड्यूल किया गया है. यह पूरा 3 दिनों का होगा. 3 दिनों में चारों एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराते नजर आएंगे और फिर समुद्र में सुरक्षित लैंड करेंगे.

भारत के गगनयान मिशन की सफलता दुनिया के सामने भारत को एक नई शक्ति के रूप में पेश करेगी. गगनयान की सफलता करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का पल होगा.

भारत का प्लान है वह 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ स्थापित  करे और 2040 तक चांद पर भारत अपने एस्ट्रोनॉट्स भेजे.  

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