राजस्थान की नहरों में प्रदूषित जल, लोगों के जीवन से खिलवाड़ कब तक ?

राजस्थान की नहरों में प्रदूषित जल, लोगों के जीवन से खिलवाड़ कब तक ?

Ramswaroop Rawatsare
रामस्वरूप रावतसरे लेखक

राजस्थान में कोरोना से कुछ राहत मिली थी कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना में आये गंदे काले पानी ने 10 जिलों के दो करोड़ नागरिकों की टेशंन बढा दी है। जो कि इसी नहर का पानी पीते है और अपने खेतों में सिंचाई करते है। 28 मई को पंजाब में हरिके बैराज से छोड़ा गया गंदा व केमिकल युक्त पानी हनुमानगढ़, पीलीबंगा, सूरतगढ़, अनूपगढ़, घड़साना होते हुए आगे बीकानेर व अन्य जिलों में प्रवेश कर गया है। इंदिरा गांधी नहर मरम्मत के नाम पर पिछले 60 दिनों से बन्द थी। जानकार लोगों का कहना है कि हर नहरबंदी के बाद पंजाब की ओर से ऐसा ही गंदा पानी नहरों में छोड़ा जाता है।

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में इसके खिलाफ लंबे समय से आंदोलन भी होते रहे हैं। लोगों ने इसके खिलाफ एनजीटी में याचिका भी लगाई थी। बताया जा रहा है पंजाब सरकार पर 50 करोड़ रुपए जुर्माना लगाते हुए सभी फैक्ट्रियों में ट्रीटमेंट प्लांट तक लगाने के आदेश हुए थे। याचिका कर्ताओं का कहना है कि इतना होने पर भी कैमिकल युक्त गन्दा पानी उसी प्रकार आ रहा है।

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इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 60 दिन की बंदी के बाद 28 मई को हरिके बैराज से पानी छोड़ा गया था। यह पानी प्रदेश के सम्बन्धित जिलों में पेयजल आपूर्ति एवं सिचाई के लिए पहुंचेगा। जलदाय विभाग इसी नहर के पानी से ग्रामीण व शहरी क्षे़त्रों के लिए पेयजल सप्लाई करता है। लिहाजा यह प्रदूषित जल इंदिरा गांधी नहर परियोजना की प्रत्येक वितरिका से होता हुआ हर शहर व गांव-ढाणी तक पहुंचेगा। मजबूरी में लोगों को यही पानी पीना पड़ेगा। प्रदूषित जल असुरक्षित कल जन जागरण समिति के रमजान अली चोपदार ने पंजाब सरकार पर पानी में जहर मिलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त गंदा पानी नहरों में डाला जा रहा है राजस्थान व पंजाब की सरकारें आंखें बन्द करके बैठी है। वहीं श्रीगंगानगर के विधायक राजकुमार गौड़ ने इस बारे में सीएम के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका व जल संसाधन विभाग के प्रमुख शासन सचिव नवीन महाजन से बात की है। श्रीगंगानगर के सांसद निहालचंद ने कहा कि केंद्र सरकार से बात कर इसका स्थायी समाधान करवाया जाएगा।

श्रीगंगानगर, हनुमानगढ के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार काले दूषित पानी में फैक्ट्रियों एवं सीवरेज का अपशिष्ट होता हैं। यह पानी पीने से पीलिया, किडनी व लीवर की बिमारी होने का खतरा अत्यधिक बढ जाता है। यही नहीं लंबे समय तक इस पानी का सेवन करने से मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है। इससे व्यक्ति निर्णय करने की क्षमता भी खो देता है। ऐसा पानी खेतों में सिंचाई के लिए भी हानिकारक है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन्दिरा गांधी नहर, गंगनहर एवं भाखड़ा सिंचाई प्रणाली में पंजाब से आ रहे दूषित जल पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य सचिव श्री निरंजन आर्य को इस समस्या के समाधान के लिए पंजाब सरकार के उच्चाधिकारियों से वार्ता करने के निर्देश दिए हैं। श्री गहलोत के निर्देश पर मुख्य सचिव ने पंजाब के मुख्य सचिव से प्रदूषित जल की रोकथाम के लिए शीघ्र कार्यवाही करने का आग्रह किया है और इस संबंध में पत्र लिखकर राजस्थान की चिंताओं से पंजाब सरकार को अवगत कराया है।

मुख्य सचिव ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पंजाब के अधिकारियों से इस मामले में उचित कार्यवाही कर प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित करने का अनुरोध किया है। मुख्य सचिव ने पंजाब के मुख्य सचिव को अवगत कराया है कि शोभा सिंह बनाम पंजाब सरकार प्रकरण में एनजीटी ने 20 जनवरी 2021 को पंजाब सरकार को सतलज एवं ब्यास नदियों में प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त एवं प्रभावी कदम उठाने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दे रखे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब इस संबंध में बनाए गए एक्शन प्लान के अनुरूप जल्द से जल्द कार्य पूर्ण कराने का प्रयास करे।

पंजाब के अधिकारियों के अनुसार लुधियाना शहर के बुडढ़ा नाला तथा जालंधर, नकोदर एवं फगवाड़ा के सीवरेज तथा औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह के कारण इंदिरा गांधी नहर में प्रदूषित जल की समस्या आती है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने केन्द्रीय प्रदूषण मण्डल को इस समस्या के समाधान के लिए एक्शन प्लान तैयार कर दिया हुआ है। जिसके तहत पंजाब द्वारा समयबद्ध रूप से एसटीपी और ईटीपी लगाने का काम किया जा रहा है। वहां के अधिकारियों ने बताया कि नहरबंदी के दौरान रोपड हैडवक्र्स से दिए जाने वाले पानी की मात्रा लगभग नगण्य होती है। इस दौरान औद्योगिक अपशिष्ट एवं सीवरेज का पानी नदी के तल में जमा होता रहता है। इस कारण नहरबंदी के बाद प्रारंभ के कुछ दिनों में छोड़े जाने वाले पानी में प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है।

राजस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पंजाब के अधिकारियों से बात की है। पंजाब के अधिकारियों ने कार्यवाही का उचित आश्वासन दिया है। राजस्थान के अधिकारियों ने उस उचित आश्वासन को जनता में प्रसारित प्रचारित करा दिया। लेकिन जो समस्या पिछले कई सालों से है उसमें कमी नहीं आई है और लगता है आने की भी नहीं है। नहर बन्दी के बाद जब इसमें पानी छोड़ा जाता है तो कैमिकल एवं अपशिष्ट युक्त काला पानी आता है। इसका मतलब यह है कि जब नहर में पानी बहता है उस समय भी इसमें कैमिकल एवं अपशिष्ट डलते हैं लेकिन पानी की आवक अधिक होने के कारण वह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। यही पानी दस जिलों के लोगों को पीने के लिए सप्लाई होता है।

हनुमानगढ, श्री गंगानगर जिले के लोग जो इस समस्या को बरसों से उठा रहे है उनका कहना है कि शुद्ध पानी का मुद्दा भी पक्ष और विपक्ष में बंटा हुआ है। राजनीतिक दलों ने भी इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है। जो दल विपक्ष में होता है, वह पूरे 5 साल इसे उठाता है। सत्ता में आने के साथ ही यह मुद्दा भूला दिया जाता है। यही अब भी हो रहा है। भाजपा का शासन था तब कांग्रेस कह रही थी कि हमारा शासन आते ही इस समस्या का समाधान करा दिया जावेगा। सत्ता मिलते ही यह मुद्दा गोण हो गया है। अब भाजपा इसका झण्डा उठाये घूम रही है। ऐसा करते हुए ये राजनीतिक लोग आगे बढ जाते है। जनता पीछे रोती रहती है।

राजस्थान में पीनेे के पानी की वैसे ही बहुत कमी है। ऐसे में 10 जिलों के लोग इस नहर के पानी पर ही निर्भर है। ऐसे में पीने का पानी भी शुद्ध नहीं मिलना किस बात की ओर इशारा कर रहा है। मसीतावाली हैड जहां से यह नहर राजस्थान में प्रवेश करती है वहां पानी में हिचकोले खाते सड़े हुए मृत पशुओं को देख लिया जाय तो पानी पीने का मन ही नहीं करता। ऐसे में फैक्ट्रियों का केमिकल एवं सिवरेज का अपशिष्ट पानी में मिले होने का समाचार लोगों को कितना विचलित करता होगा। इसका अंदाजा जिम्मेदार लोगों को होना चाहिए।

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