आख़िर कब तक नाटक के माध्यम से महिलाओं पर हो रहे एसिड अटैक के प्रति किया जागरूक

आख़िर कब तक नाटक के माध्यम से महिलाओं पर हो रहे एसिड अटैक के प्रति किया जागरूक

  • एसिड अटैक पीड़िता की हिम्मत और हौसले की कहानी देख दर्शक भावों से भर गए,
  • एसिड अटैक ‘आख़िर कब तक’? नाटक को खूब मिली वाहवाही,

रिपोर्टर: राजकुमार गुप्ता

वाराणसी: एसिड अटैक पीड़िता की हिम्मत और हौसले की कहानी ‘आख़िर कब तक ?’ देख दर्शक भावों से भर गए। महिलाओं को लेकर समाज में फैली कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए रेड ब्रिगेड ट्रस्ट और आक्सफैम इंडिया आगे आया है। ट्रस्ट की लड़कियों ने मिलकर महिला अधिकार और हिंसा के ख़िलाफ़ ‘ग्लोबल एक्शन वीक’ के तहत कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत शनिवार को अस्सी घाट पर नुक्कड़ नाटक किया गया।

नुक्कड़ नाटक के जरिए महिलाओं से संबंधित विभिन्न सामाजिक समस्याओें के प्रति लोगों को जागरूक किया। ट्रस्ट की लड़कियों ने महिला हिंसा, भेदभाव, ग़ैर बराबरी, अम्ल आक्रमण (एसिड अटैक), खुले में तेज़ाब बिक्री आदि जैसी समस्याओं को नुक्कड़ नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों के साथ क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। सभी ने महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के प्रति प्रस्तुत किए गए बेहतरीन नाटक की प्रशंसा की।

रेड ब्रिगेड ट्रस्ट के प्रमुख अजय पटेल ने उत्साह वर्धन किया नाटक की रूपरेखा रतन यादव ने तैयार की। संचालन राजकुमार गुप्ता ने किया। नाटक आख़िर कब तक में दिखाया गया कि एक एसिड अटैक पीड़िता को समाज किस तरह से उपेक्षित और ग़ैर बराबरी करता है। समाज इस तरह से अपनी बात रखता है कि नारी को लगे कि अब आत्महत्या ही उसे लिए अंतिम विकल्प है। एसिड बनाने वाले तत्व हाइड्रोजन, सल्फर और ऑक्सीजन का किरदार भी कलाकारों ने निभाया।

ये तत्व आपस में बातें करते हैं कि हम तो दवाएं बनाने के काम आते थे लेकिन ये क्या इंसानों ने खुद के विनाश का माध्यम ही हमें ही बना लिया। कुछ भी हो पीड़िता हिम्मत नहीं हारती और कहती है कि मैं क्यों मरूं। मैं जीऊंगी…। नारी तो हिम्मत, हौसले की मिसाल है इसलिए मैं नहीं मरूंगी।

मैं हूं मेरी खुद की ताकत –

नाटक में आख़िर कब तक, मैं हूं मेरी खुद की ताकत, खुद की जिम्मेदारी, न मैं कमजोर हूं, न ही अबला हूं, मैं हिम्मत वाली नारी हूं…., जैसे संवाद छाए थे। नाटक में एक भारतीय नारी की हिम्मत और हौसला दिखाया गया। नाटक का केंद्र था कि एसिड अटैक से पीड़ित औरत के लिए हिम्मत और हौसला कायम रख पाना चुनौतिपूर्ण होता है। साथ ही हर दिन एक आवाज़ उठाओ- समता युक्त समाज बनाओ। लिखो-बोलो-निकालो-गाओ,ग्लोबल एक्शन वीक मनाओ ज़ोरदार नारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर एसिड पीड़िता संगीता पटेल, बादामा देवी सहित कलाकारों में ग़ाज़ीपुर से प्रियंका भारती, सुष्मिता भारती, अंकिता बरनवाल, प्रीति सरोज, निर्भया के गाँव बलिया से आर्या पांडे, स्मृति पांडे, लखनऊ से रूबी खान, प्रियंका वर्मा, नरगिस आदि लोग उपस्थित थे।

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