वशिष्ठ वाणी/वाराणसी। महमूरगंज स्थित मोतीझील परिसर में पंडित हरिराम द्विवेदी भोजपुरी साहित्य शोध न्यास द्वारा प्रख्यात साहित्यकार पंडित हरिराम द्विवेदी ‘हरिभैया’ की द्वितीय पुण्यतिथि पर सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण एवं लोक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रचनाकार डॉ. जय प्रकाश मिश्र की पुस्तक ‘धनुषयज्ञ शतक’ का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. कमलाकर त्रिपाठी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईटीआई के पूर्व निदेशक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सारस्वत अतिथि प्रो. सविता भारद्वाज व प्रो. आशा यादव द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
समारोह के दौरान विख्यात हास्य-व्यंग्य रचनाकार डॉ. नागेश शांडिल्य ने हरिराम द्विवेदी को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पंडित द्विवेदी न केवल हिंदी कवि और भोजपुरी साहित्य के विद्वान थे, बल्कि अत्यंत सरल स्वभाव और विनम्र व्यक्तित्व के धनी भी थे। उन्होंने बताया कि “जो भी उनसे मिलने जाता, वे उससे आदरपूर्वक भोजपुरी में ही वार्तालाप करते थे।” पंडित द्विवेदी को साहित्य अकादमी पुरस्कार, साहित्य भूषण सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त थे।
उनकी प्रमुख कृतियों में मर्यादा इस देश की पहचान है, गंगा पूजा है, धर्म दिन है, ईमान है सहित लोकप्रिय गंगा गीत और कविता संग्रह अंगनइया, पातरि पीर, जीवनदायिनी गंगा, साईं भजनावली, पानी कहे कहानी, पहचान, नारी, रमता जोगी, बैन फकीर, हाशिये का दर्द, नदियो गइल दुबराय आदि शामिल हैं, जो आज भी पाठकों में लोकप्रिय हैं।
कार्यक्रम में मिर्जापुर की पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, गाजीपुर के प्रो. रामनारायण तिवारी तथा वाराणसी के डॉ. दुर्गेश उपाध्याय को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पंडित रामानंद तिवारी, राजेश कुमार द्विवेदी, अरुण कुमार द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं शोधकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम सुधार सिंह द्वारा किया गया।


