क्या गहलोत ने पायलट को सत्ता, संगठन से दूर रखने का पूरा इंतजाम कर लिया है?

क्या गहलोत ने पायलट को सत्ता, संगठन से दूर रखने का पूरा इंतजाम कर लिया है?

  • रामस्वरूप रावतसरे

राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के मध्य चल रहे सियासी संकट को अब एक साल पूरा हो चुका है। पिछले साल जुलाई में ही पायलट और उनके समर्थक विधायकों ने सरकार में सम्मानजनक स्थिति को लेकर गहलोत नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी। मामला बिगड़ने के बाद आलाकमान ने एक कमेटी का गठन कर कुछ समय के लिये खींचतान के माहौल को शांत कर दिया गया। लेकिन रुक-रुककर पायलट और उनके समर्थक विधायकों की टीस फिर से उठती रही है। वहीं कांग्रेस का हाथ छोड़ बीजेपी में आये ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने के बाद फिर से बगावती सुर सामने आने लगे हैं।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में चल रही उधल-पुथल को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी सचेत है, उन्हें पायलट की नाराजगी से पार्टी को होने वाले नुकसान का भी आंकलन है। यही कारण है कि आला कमान और दिल्ली के दिग्गज नेता भी पालयट की लैंडिंग किसी भी सूरत में बीजेपी की जमीन पर नहीं होने देना चाहते। पायलट खेमे की नाराजगी दूर करने के लिये पार्टी आलाकमान राज्य सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में उनका ख्याल रख सकती है, साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों में उनके लिये कुछ सम्मानजन पद दिये जा सकते हैं। इस संबंध में जयपुर दौरे पर आये प्रदेश प्रभारी अजय माकन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से दो दौर की वार्ता पूर कर चुके हैं। और अब सारी रिपोर्ट सोनिया गांधी को देने के बाद जल्द ही प्रदेश कांग्रेस और सरकार में बदलाव पर फैसला हो सकता है।

जानकारी के अनुसार राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सुलह के लिए कांग्रेस के राज्य प्रभारी अजय माकन दो दिन जयपुर में रहे। दो बार अशोक गहलोत से मिले और फॉर्मूला भी दिया, लेकिन मंत्रमिंडल में पायलट की हिस्सेदारी पर बात अटक गई। हालांकि राजनीतिक नियुक्तियों और पार्टी संगठन में नियुक्तियों पर गहलोत ने सहमति दे दी बताई। समझा जा रहा है कि गहलोत के तर्क पर सोनिया गांधी से चर्चा के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के बीच का फॉर्मूला निकाला जाएगा। वहीं कांग्रेस आलाकमान को डर है कि कहीं देर की तो गहलोत और पायलट की इस जंग से पार्टी में असंतोष न भड़क सकता है।

सूत्रों के अनुसार अजय माकन ने गहलोत से दो बार मुलाकात की, लेकिन पायलट कोटे से मंत्रियों की संख्या वे तय नहीं करवा पाए हैं। गहलोत की भी कुछ शर्ते है वे मंत्रीमण्डल विस्तार से सम्बन्धित सभी प्रकार के फैसले खुद करना चााहते हैं। गहलोत के इस रवैए से पायलट खेमा खुश नहीं है। जानकार लोगों का कहना हे कि पायलट की उम्मीद अभी भी माकन पर टिकी है कि रास्ता निकाल लेंगे।

मंत्रिमंडल एवं राजनीतिक नियुक्तियों में अशोक गहलोत खेमे का तर्क है कि इन 19 विधायकों के बिना भी गहलोत सरकार पूर्ण बहुमत में है। इनके बिना 200 में से 101 विधायक कांग्रेस के है। फिर इनकी हिस्सेदारी क्यों? अजय माकन इस कोशिश में है कि सरकार की स्थिरता पर भी संकट न हो और पायलट गुट को सम्मानजक जगह भी मिल जाए, लेकिन पायलट मंत्रिमंडल में बड़ी हिस्सेदारी से खोया रुतबा हासिल करना चाहते है तो गहलोत पायलट को अब बराबर का नेता नहीं मानते है और ना ही पायलट की ऐसी ताकत है कि सरकार को किसी प्रकार का नुकसान पहुचा सकते है। जानकार लोगों का कहना है कि असली पेंच ये ही है।

अजय माकन जयपुर में दो बार गहलोत से और उनके गुट के नेताओं से मिले। लेकिन एक बार भी सचिन पायलट या उनके समर्थकों से नहीं मिले। माकन नहीं चाहते थे कि गहलोत नाराज हो, लेकिन माकन को डर है कि इस विवाद का रास्ता नहीं निकला तो राजस्थान कांग्रेस में भी सत्ता में भागीदारी का ढ़ाई साल से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं का सब्र न टूट जाए और पंजाब की तरह के ही हालात न खड़े हो जाए।

राजस्थान में सियासी संकट का समाधान निकलना सम्भव नहीं लगता है। जानकार लोगों का कहना है कि अजय माकन का जयपुर आना और मिडिया के द्वारा यह प्रचारित कराना कि वे दोनों गुटों में सकारात्मक समन्वय हो, इसके लिए भरसक प्रयास कर रहे है। पायलट एवं उनके गुट को लगता है कि अजय माकन का यह दौरा खुशियों भरा होगा। किन्तु हालात इतने सहज नहीं है। जैसा बताया जा रहा है। राजनीति में दखल रखने वालों का कहना है कि जैसे जैसे समय व्यतीत हो रहा है, उससे पायलट की ताकत भी कमजोर होती जा रही है। कारण इनके समर्थन के विधायको एवं कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे है। उनको तवज्जों नहीं मिल रही है। ऐसे में जनता के बलबुते पर हुकार भरना भी मुशिकल होता जा रहा है। हालांकि पायलट इस स्थिति को समझ चुके है कि जब तक गहलोत है उनको व उनके समर्थकों को सरकार में किसी प्रकार की भागीदारी मिलना सम्भव नहीं है। ऐसे में उनका प्रयास यही है कि आगामी चुनावों तक कार्यकर्ताओं को एक जुट रखते हुए अपना जनाधार बनाए रखा जाय।

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