निराश्रित गोवंशों व घडरोजों के आतंक से किसान परेशान

निराश्रित गोवंशों व घडरोजों के आतंक से किसान परेशान

रिपोर्टर: प्यारेलाल यादव


चिरईगांव: तमाम सरकारी दावों के इतर किसानों की समस्याओं में कोई कमी होती नहीं दिख रही है। खेती करने के लिए उर्वरक, बीज,कीटनाशक दवाओं, जुताई,सिचाई, कटाई की बढ़ती कीमतों के साथ साथ किसानों को निराश्रित गोवंशों के साथ घडरोजों के आतंक से भी जूझना पड़ा रहा है। रवी सीजन की प्रमुख फसल गेंहू में बालियां निकल रही हैं।किसानों के दिन रात निगरानी के बावजूद आवारा पशुओं के आतंक से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। झुंड के झुंड निराश्रित गोवंश फसलों को रौंद रहे हैं।

वहीं कृषि विशेषज्ञों की माने तो बालियां निकलते समय फसल की स्थिति काफी नाजुक हो जाती है। यदि इस समय में गेहूं की फसलें पर गोवंशों या घडरोजों के पैर पड़ जाते हैं तो फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। शुरुआती दौर में गोवंशों द्वारा चट करने के बाद भी फसलें पुनः पुंज के साथ विकसित हो जाती हैं। लेकिन बालियां निकलते से फसलों की निगरानी बढ़ा देनी चाहिए। वहीं किसान रात दिन निगरानी में जुटे हुए हैं उसके बाद भी फसलों को बचा पाना मुश्किल बना हुआ है।

इस बाबत जाल्हूपुर के किसान, भग्गू यादव, सिरताज मास्टर, विष्णुपूरा के विषई तिवारी, नन्दलाल तिवारी, छितौना के कमला यादव, प्रेम शंकर, कुकुढा के अमरनाथ तिवारी, उकथी के भैरों मौर्य, रमना के राजदेव यादव इत्यादि किसानों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर गोवंश आश्रय स्थल नहीं होने से आवारा पशु घूम फिर कर खड़ी फसलों को बरबाद कर रही हैं।प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यो में गोवंश आश्रय स्थल भी है।

जो ग्राम पंचायत स्तर बनाए जा रहे हैं।लेकिन गोवंश आश्रय स्थल निर्माण की मन्द स्थिति अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बीते वर्ष से ही उच्च अधिकारियों के फटकार के बाद भी विकास खण्ड गोवंश आश्रय स्थलों की संख्या दहाई तक नहीं पहुँच पाई है। इस बाबत कृषि अधिकारी सुबास मौर्य का कहना है कि शासन का शक्त निर्देश है कि गांवो गोवंश आश्रय स्थल बनाए जाए।इसके लिए जमीने चिन्हित की जा रही हैं। जिन गांवों में जमीन उपलब्ध हो गई है वहां कार्य चल रहे हैं।वहीं घडरोजों से फसलों को बचाने के लिए सरकार एक नई व्यवस्था लाने जा रही है।जिसके तहत खेतों में बाड़ लगाए जाने हैं।

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