नकली और मिलावटी उर्वरकों की घरेलू पहचान

नकली और मिलावटी उर्वरकों की घरेलू पहचान

अवधेश कुमार
लेखक डॉ अवधेश कुमार

किसान भाइयों के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले कृषि निवेशकों में सबसे महंगी सामग्री बाजार में मिलने वाले उर्वरक होते हैं रासायनिक उर्वरकों में मिलावट का सीधा असर किसानों पर पड़ता है जिस को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर अभियान चलाती रहती है तथा जिला स्तरीय कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी दुकानों पर अचानक पहुंचकर उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच हेतु नमूने लिया करते हैं किसान भाई उर्वरक खरीदते समय रासायनिक उर्वरकों की घरेलू जांच निम्न प्रकार कर सकते हैं।

और मिलावटी उर्वरकों1

यूरिया- इसके दाने सामान आकार के गोल सफेद एवं चमकदार होते हैं यूरिया के दाने को सामान्य पानी में डालने पर पूर्णतया घुल जाती है और छूने पर पानी ठंडा महसूस होता है दाने को गर्म तवे पर रखने पर गोल गाने भूल जाते हैं और यदि आज को तेज कर दिया जाए तो अवशेष कुछ भी नहीं बचता है।

सुपर फास्फेट- इसका दाना पूरा काला बादामी रंगों से युक्त होता है यह सख्त दानेदार होता है तथा नाखून से आसानी से टूट जाता है बाजार में चूर्ण के रूप में भी उपलब्ध होता है इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यदि इस को गर्म तवे पर गर्म किया जाए तो इस के दाने फूलते नहीं इस दानेदार उर्वरक की मिलावट एनपीके एवं डीएपी उर्वरक के साथ करने की आशंका बनी रहती है।

जिंक सल्फेट- जिंक सल्फेट के साथ यदि डीएपी के घोल को मिलाया जाए तो थक्का बन जाता है जबकि इसी डीएपी को मैग्नीशियम सल्फेट के घोल में मिलाने पर ऐसा नहीं होता है जिंक सल्फेट में जो मिलावट की संभावना रहती है वह मैग्नीशियम सल्फेट है जोकि जिंक सल्फेट के ही समान होता है इसलिए इसकी पहचान करने में आसानी नहीं होती पतले कास्टिक के घोल के साथ यह जिंक सल्फेट के घोल को मिलाया जाता है तो यह मटमैला सफेद माड जैसा बन जाता है और जब इसी में कास्टिक का घोल गाढ़ा किया जाए तो अवछेप घुल जाता है।

डीएपी- इसका दाना गोल भूरा काला बादामी रंग का होता है जिसे नाखून से तोड़ने पर आसानी से टूट जाता है डीएपी रासायनिक उर्वरक के दाने को तंबाकू की तरह चूना में मिलाकर रगड़ने से उसमें तेज अमोनिया जैसी गंध निकलती है जिसे संगना आसान नहीं रहता और छींक आने लगती है यूरिया की तरह गर्म तवे पर रखने से दाने फूल जाते हैं।
पोटाश- इसके कणो को नम करने पर आपस में चिपकते नहीं हैं इसके चूर्ण पिसे नमक काला कारण एवं लालमिर्च जैसा मिश्रण का होता है उर्वरक का लाल भाग पानी में घोलने पर उसके ऊपर तैरने लगता है।

कृषकों को निम्न बातों का भी ध्यान देना चाहिए उर्वरक की खाली बोरियों को उर्वरक विक्रेताओं को कभी वापस नहीं करना चाहिए किसान भाई उर्वरक खरीदते समय उर्वरक विक्रेताओं से रसीद जरूर मांगे क्योंकि सरकार द्वारा सभी उर्वरकों का मूल्य निर्धारित है यदि दुकानदार उर्वरक खरीदते समय रसीद नहीं देता है तो इसकी शिकायत उप कृषि निदेशक एवं जिला कृषि अधिकारी को तुरंत दें यूरिया डीएपी सिंगल सुपर फास्फेट पोटाश एवं एनपीके आदि उर्वरकों के बोरी का वजन 50 किलोग्राम होता है खरीदते समय इसका वजन करा ले यूरिया की 45 किलोग्राम की बोरी भी उपलब्ध है उसका भी वजन कराये उर्वरक के बोरे पर अधिकतम खुदरा मूल्य लिखा होता है उसे देखकर ही मूल अदा करें यदि अधिक मूल्य दुकानदार मांग रहा है तो रसीद जरूर उससे मांगे।

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