धारा 370 पर दिग्विजय सिंह का बेतुका बयान

धारा 370 पर दिग्विजय सिंह का बेतुका बयान

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लेखक राजेश माहेश्वरी

ध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अधिकतर समय अपने विवादित बयानों के लिए ही चर्चा में रहते हैं। ताजा मामले में दिग्गी राजा ने एक पकिस्तानी पत्रकार से बतियाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का फैसला दुखद है। जम्मू-कश्मीर में न लोकतंत्र है, ना ही कश्मीरियत है। उन्होंने जिक्र किया कि किस तरह एक समय जम्मू-कश्मीर का राजा हिंदू था और सभी मिलकर रहते थे। उन्होंने कहा, कांग्रेस सत्ता में आई तो आर्टिकल 370 पर पुनर्विचार करेंगे।

दिग्विजय सिंह के इस बयान को पहले तो भाजपा आईटी सेल की शरारत माना गया लेकिन बाद में इस बात की पुष्टि हो गई कि उन्होंने उक्त बातें की थीं। चैतरफा निंदा होने पर बजाय खेद व्यक्त करने के दिग्विजय ने ट्विट कर करीब आरएसएस से जुड़ी 6 साल पुरानी की एक खबर का हवाला दिया। इसमें आरएसएस की तरफ कहा गया था कि पाकिस्तान तो हमारे भाई जैसा है। सरकार को उसके साथ रिश्ते मजबूत करना चाहिए। दिग्विजय ने कहा कि, क्या मोहन भागवत जी को भी पाकिस्तान भेजोगे और उनकी भी एनआईए जांच कराओगे? दिग्विजय ने डा. मोहन भागवत के किसी पुराने बयान का उल्लेख करते हुए अपना बचाव किया किन्तु उन्हें अपनी पार्टी के भीतर से भी समर्थन नहीं मिला।

जम्मू-कश्मीर हमेशा से ही भारत का अभिन्न अंग रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और समितियां इस मामले को भारत का आंतरिक मामला बताती रही हैं। लेकिन, इसके बावजूद कांग्रेस नेताओं की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिए जाते रहे हैं। भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को हमेशा से ही वोटबैंक पॉलिटिक्स के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करती रही है। इस प्रयास में कांग्रेस ये भी नहीं सोचती है कि वह इस तरह की बयानबाजी से पाकिस्तान के करीब खड़ी हो जाती है। इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस के भीतर जम्मू-कश्मीर में धारा 370 दोबारा लागू कराने वाले लोग मौजूद है? क्या अपने बयानों से कांग्रेस को पाकिस्तान के साथ खड़ा होने में कोई ऐतराज नही है?

दिग्गी राजा के इस विवादित बयान के बाद भाजपा के प्रवक्ता अब एक बार फिर से कांग्रेसी नेताओं पर हमलावर हो गए हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से इस संबंध में स्पष्टता मांगी है और कहा है कि पार्टी का इस मैटर पर क्या स्टंट है। पात्रा ने कहा कि दिग्विजय के इस बयान पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी क्या सोचते हैं? क्या ये कांग्रेस की राय है या नहीं है?

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हम चाहते हैं कि राहुल गांधी इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सच्चाई बताएं। दिग्विजय कहते हैं कि अगर मोदी जी सत्ता से हटते हैं और कांग्रेस सरकार आती है तो वो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से लेकर आएंगे। उनका यह रवैया दर्शाता है कि कांग्रेस और पाकिस्तान के विचार एक जैसे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का मुद्दा आज भी उतना ही संवेदनशील है जितना 2019 में था। यही कारण है कि विपक्षी दल के नेता धारा 370 पर कुछ भी बोलने से हमेशा बचते हैं।

दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए इस कथित बयान पर नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैं दिग्विजय सिंह का बहुत-बहुत आभारी हूं। लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बारे में बात की इस से मुझे खुशी है। अब्दुल्ला ने कहा कि मैं कांग्रेस के इस बड़े दिल से काफी प्रभावित हुआ हूं और अगर दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए इस बयान पर आगे काम होता है तो मैं दिल से इसका स्वागत करूंगा। मैं उम्मीद करता हूं कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस की सरकार एक बार फिर से धारा 370 गौर फरमाएगी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के अलावा किसी भी प्रमुख राजनीतिक और बौद्धिक क्षेत्र की हस्ती ने दिग्विजय सिंह की बात का समर्थन नहीं किया।

यहां तक भी ठीक था किन्तु गत दिवस पहले उनके छोटे भाई विधायक लक्ष्मण सिंह ने साफ कहा कि धारा 370 की वापिसी असम्भव है। लेकिन दिग्विजय के लिए सबसे ज्यादा शर्मनाक स्थिति पैदा कर दी लक्ष्मण सिंह की पत्नी रुबीना सिंह ने जिन्होंने अपने आदरणीय जेठ के संदर्भित बयान को गैर जरूरी बताते हुए कश्मीरी पंडितों की बदहाली का मामला उठाकर कांग्रेस पार्टी पर भी अनेक सवाल दागे। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की धर्मपत्ीन रुबीना कश्मीरी ब्राहमण है। कश्मीर घाटी से उनके पलायन का जिक्र करते हुए उन्होंने 370 हटाये जाने को कश्मीर के हित में बताया। हालांकि लक्ष्मण पहले भी दिग्विजय और कांग्रेस से अपनी असहमति अनेक मुद्दों पर व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन उनकी पत्नी ने जिस तरह मुखर होकर अपने जेठ के खिलाफ मोर्चा खोला उससे दिग्गी राजा की जमकर भद्द पिटी।

और तो और कांग्रेस ने अभी तक उनके बयान पर अधिकृत तौर पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि कुछ नेताओं ने उसे निजी राय बताकर पार्टी को बचाने का प्रयास किया है, लेकिन ज्यादा होशियारी दिखाने के फेर में दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस का बड़ा नुकसान कर दिया। पता नहीं गांधी परिवार को वे कितना खुश कर पाएंगे लेकिन उप्र, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव में इस बयान पर कांग्रेस को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। सवाल ये है कि गांधी परिवार अपने इस प्रबल समर्थक को इस तरह के जहरीले बयान देने से रोकने की कोशिश क्यों नहीं करता।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशंस को लिखे एक पत्र में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के हवाले से कश्मीर में हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए थे। दरअसल, राहुल गांधी ने एक बयान में कहा था कि कश्मीर को लेकर जो जानकारी मिल रही है, उसके हिसाब से वहां गलत हो रहा है और लोग मारे जा रहे हैं। राहुल गांधी आमतौर पर अपने बयानों की वजह से पाकिस्तान के पोस्टर ब्वॉय बनते रहे हैं। इस लिस्ट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भी शामिल हैं। पी चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य के राजनीतिक दलों के गठबंधन बनाने को स्वागतयोग्य कदम बताया था। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर तो मोदी सरकार को हटाने के लिए पाकिस्तान से मदद करने तक की मांग कर चुके हैं। शशि थरूर भी इसी तरह के बेतुके बयान दे चुके हैं।

असल में देखा जाए तो राहुल गांधी, चिदंबरम, शशि थरूर और मणिशंकर जैसे कांग्रेस के नेता ऊलजलूल बातों के जरिये पार्टी के लिए मुसीबतें पैदा कर चुके हैं। ऐसे में दिग्विजय सिंह द्वारा एक पाकिस्तानी पत्रकार से कश्मीर घाटी में लोकतंत्र के काल कोठरी में बंद होने और धारा 370 की वापिसी जैसी बातें करना पाकिस्तान के भारत विरोधी दुष्प्रचार का समर्थन करने जैसा ही है। कांग्रेस पार्टी यदि अपनी बुरी स्थिति से उबरना चाहती है तो उसे न सिर्फ दिग्विजय अपितु उन जैसे बाकी नेताओं की बद्जुबानी रोकनी चाहिए जो पहले से ही घुटनों पर आ चुकी पार्टी को जमीन में और गडढे में डालने में लगे हैं।

-लेखक राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

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