वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। काशी के प्राचीन मणिकर्णिका घाट पर लोकमाता अहिल्याबाई होलकर सहित कई ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की मूर्तियों को हटाकर तोड़े जाने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कमेटी का कहना है कि यह कार्रवाई काशी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर सीधी चोट है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन देने निकले थे कार्यकर्ता, रास्ते में रोका गया

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में लगभग 20–25 कार्यकर्ता प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन देने जा रहे थे। ज्ञापन के माध्यम से मूर्तियों को पुनः स्थापित करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जानी थी।

लेकिन ज्ञापन सौंपने से पहले ही पुलिस ने जुलूस को बीच रास्ते में रोक लिया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लेकर वाहनों में बैठाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

कांग्रेस ने कहा— ‘लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन’

कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला हनन बताया। महानगर अध्यक्ष चौबे ने कहा—

“अहिल्याबाई होलकर जैसी महान समाज सुधारक, राष्ट्रसेविका और काशी में घाटों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली व्यक्तित्व की मूर्ति को हटाना इतिहास का अपमान है। यह जनभावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम है।”

उन्होंने कहा कि काशी की पहचान, संस्कृति और विरासत से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने की चेतावनी

कांग्रेस ने मूर्तियों के पुनः स्थापना, उन पर हुए नुकसान की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से संगठन के भीतर आक्रोश बढ़ गया है और पार्टी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वाराणसी कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगी।