गोपनीय आख्या शिक्षकों के लिए काले कानून से कम नहीं-जिलाध्यक्ष

गोपनीय आख्या शिक्षकों के लिए काले कानून से कम नहीं-जिलाध्यक्ष

  • बेसिक शिक्षको ने एसीएम चतुर्थ को सौंपा 20 सूत्रीय मांग पत्र।
  • महेश पाण्डेय ब्यूरो चीफ

वाराणसी: वाराणसी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा विगत कुछ समय से शिक्षकों के प्रति इस प्रकार के नियम-कायदे बनाए जा रहे हैं। जो सरासर अव्यवहारिक और शोषण की पूर्ति के उद्देश्य से परिपूर्ण हैं। हाल ही में शिक्षकों के मूल्यांकन को लेकर गोपनीय आख्या के लिए फरमान जारी हुआ है। इसमें कायाकल्प के तहत होने वाले कार्यों के लिए भी शिक्षकों के अंक निर्धारण किया जाना है। जबकि यह कार्य पंचायती राज विभाग द्वारा किए जाते हैं।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ नें ऐसे तुगलकी फरमानों के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। उक्त बातें गुरुवार को एसीएम चतुर्थ को 20 सूत्रीय मांगों को देने के पश्चात पत्रकारो व शिक्षकों को सम्बोधित करते ज़िलाध्यक्ष सकलदेव सिंह ने कहाकि विद्यालयों में प्रधानाध्यापक कम्पोजिट ग्राण्ट से कार्य करता है। इसमें मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना ही सम्भव नहीं होता। शासन को मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करना चाहिए।

जबकि आए -दिन अध्यापकों के प्रति नकारात्मक आदेशों को निर्गत कर अनावश्यक रूप से शिक्षकों को आन्दोलन के लिए बाध्य किया जाता है। वार्षिक प्रविष्टि के लिए तय मानक सीधे तौर पर शिक्षक विरोधी हैं और ऐसी दुर्व्यवस्था का प्राथमिक शिक्षक संघ पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने इसे काले कानून की संज्ञा दी। ज़िला मन्त्री शैलेंद्र विक्रम ने कहा कि महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) को अध्यापकों की मान – मर्यादा का ध्यान रखते हुए और नीतियां निर्धारण करते समय शिक्षाविदों से विमर्श करने के उपरान्त आदेश पारित करना चाहिए।

नीतियां व्यवहारिक और सकारात्मक होंगी, तो उनके अनुपालन में सरलता होगी। साथ ही सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि महानिदेशक के आदेश के अधिकांश बिन्दु पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अभिभावकों की स्थिति को न समझते हुए ई-लर्निंग को लेकर भी अंक निर्धारण करना सामाजिक शून्यता कोल इसी क्रम में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय नेतृत्व के आह्वन पर एसीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री व बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के मंत्री को ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष संजय गुप्ता, संयुक्त मंत्री राजीव सिंह, कोषाध्यक्ष डॉ मनीष कुशवाहा,जितेंद्र सिंह, विनोद सिंह, संतोष सिंह, अनिरुद्ध वर्मा ,राजेश्वर सिंह, दीपक पाण्डेय, रमेश यादव, अरविन्द समेत अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।

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