आनंद मार्ग स्कूल में आयोजित सेमिनार का समापन

आनंद मार्ग स्कूल में आयोजित सेमिनार का समापन

संवाददाता प्रदीप दुबे

गाजीपुर: आनंद मार्ग स्कूल में आयोजित सेमिनार का समापन रविवार को किया गया। इस मौके पर आचार्य आनंद वर्धन ब्रह्मचारी ने मानवीय अस्तित्व की तुलना रथ और रथी से करते हुए कहां कि रथ की तरह ही शरीर एक जैविक यंत्र है। शरीररूपी रथ का यात्री आत्मा है। विवेक सारथी, मन लगाम है।

उन्होंने कहां कि इंद्रिया अश्व है। विवेकहीन सारथी संशारालय की झाड़-झंखाड़ की ओर लेकर चला जाता है और विवेकवान इसे देवालय की ओर लेकर जाता है। शरीर रूपी रथ को चलाने के प्रकृत विज्ञान को ब्रह्म विज्ञान कहते है। जिस व्यक्ति की विवेक और बृद्धि जाग पड़ी है, जिसकी विचार शक्ति उग्र हुई है, उसका मन हमेशा बुद्धि के साथ युक्त रहता है। तत्पर्य यह है कि मनरूप लगाम सर्वदा ही विवेकरूपी सारथी द्वारा नियंत्रित रहता है। स्वाभाविक नियमानुसार उसका इंद्रिय समूहरूपी अश्व बुद्ध के वशीभूत हो जाता है।

आध्यात्मिक साधना का अनुशिलानात्मक ज्ञान से ही यह सब संभव है। अष्टांग योग के यम, नियम, आसन व प्राणायाम द्वारा इंद्रियों पर नियंत्रण हो जाता है। प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि द्वारा मन तथा बृद्धि का नियंत्रण संभव है। ब्रह्म संप्राप्ति ही मनुष्य के जीवन का लक्ष्य है।

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