छत्रबली सिंह ने सपा का दामन छोड़ थामा बीजेपी का दामन

छत्रबली सिंह ने सपा का दामन छोड़ थामा बीजेपी का दामन

  • रिपोर्ट: रन्धा सिंह

चंदौली। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने सपा का दामन छोड़ थामा बीजेपी का दामन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह व निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता सिंह ने चंदौली बीजेपी कार्यालय पहुंचे जहां जिलाध्यक्ष अभिमन्यू सिंह से मिलकर बीजेपी का दामन थाम पार्टी का झंडा लिया, जिसे वह अपनी वाहन पर लगाएंगे। हालांकि सियासी गलियारे में गहमागहमी यह रही कि दोनों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है।

लेकिन बीजेपी जिलाध्यक्ष अभिमन्यू सिंह ने यह कहते हुए कयासों पर विराम लगा दिया कि दोनों पहले से ही भाजपा के प्राथमिक सदस्य हैं। उन्होंने पार्टी का झंडा लिया है ताकि अपने वाहन पर लगा सकें। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से ठीक पहले दंपती के इस कदम से जिले की सियासत गरमा गई है।

जानकारी के अनुसार जब उत्तर प्रदेश बसपा सरकार बनी थी तब इनके वाहन पर बसपा का झंडा लगा था, उसके बाद सपा सरकार में सपा का झंडा लगा कर चलते थे अब पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह और उनकी पत्नी सरिता सिंह ने वाहन पर बीजेपी का झंडा लगाए नजर आएंगे। दरअसल सूबे में जब-जब सरकार बदली दोनों ने अपना चोला भी बदल लिया। राजनीति का रुख भांपने में माहिर छत्रबली सिंह की तकरीबन सभी दलों में गहरी पैठ बना रखी है।

यही वजह है कि अपनी मर्जी से सभी दल में परिवर्तन करते चले आ रहे हैं। पति-पत्नी दोनों ने पिछला चुनाव बसपा के समर्थन से लड़ा। और अपनी जीत दर्ज करने के बाद इनको लगा कि बसपा में रहते हुए अपनी हनक बरकार रखी दखते देखते जब इनको लगा कि बसपा में रहकर लाल बत्ती नहीं मिल पाएगी तो इन्होंने ने अपनी उपस्थिति सपा में दर्ज कराली सपा में जाने के बाद जनपद के दिग्गज सपाई पूर्व सांसद रामकिशुन के पुत्र का टिकट छीनकर अपनी पत्नी सरिता सिंह को दिलवा दिया।

जहां चन्दौली की राजनीति में एक नया मोड़ आया गया जहाँ जिले के दिग्गज नेता रामकिशुन चाहकर भी अपने पुत्र को टिकट नही दिला पाये और चारों खाने चित्त हो गए और सरिता सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बन गईं। 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो छत्रबली सिंह ने बगैर देरी किए भाजपा का दामन थाम लिया और सरिता सिंह ने भी सपा में अपनी गतिविधियों को सीमित कर दिया। तमाम विरोध के बाद भी बीजेपी विधायक सुशील सिंह सरिता सिंह को कुर्सी के बेदखल नहीं कर सके। अब पंचायत चुनाव से ठीक पहले नया दांव चलकर जिले की सियासत गरमा दी

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