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Mon. Apr 15th, 2024

केंद्र सरकार ने CAA को लेकर जारी किया नोटिफिकेशन, देशभर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त

PM Modi on CAA: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने एक बड़ा दांव खेल दिया है. सरकार सीएए को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर केंद्र सरकार की ओर से सोमवार देर शाम को अधिसूचना जारी कर दी गई है. गृह मंत्रालय की ओर से इसको लेकर पूर्व में ही ऐलान किया गया था. इस कानून के लागू होने से भारत में रहने वाले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के लोगों को नागरिकता मिल जाएगी. बीजेपी ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान घोषित किए गए अपने मैनिफेस्टो में भी इसको शामिल किया था. नोटिफिकेशन जारी होते ही देशभर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है. खासकर पश्चिम बंगाल में सीआरपीएफ और पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात की गई हैं. 

इस अधिसूचना में मुस्लिम समुदाय के शरणार्थियों को शामिल नहीं किया गया है. सीएए को लेकर होम मिनिस्ट्री ने अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत गृह मंत्रालय ने नागरिकता देने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है. इसके जरिए एप्लिकेंट ऑनलाइन तरीके से सिटिजनशिप के लिए आवेदन कर सकेंगे. एप्लिकेंट्स को इस प्रक्रिया में अपने दस्तावेजों में सिर्फ भारत में अवैध तरीके से शरण लेने का साल घोषित करना होगा और इसके लिए किसी भी तरह के डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन की दरकार नहीं होगी.

जानिए CAA की बड़ी बातें

सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी CAA लागू होने से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है. 

तीनों पड़ोसी मुल्कों से आए शरणार्थी जो लंबे समय से भारत में रह रहे हैं उनके लिए भारतीय नगरिकता का रास्ता खुल गया है. 

यह सभी मजहबों को मानने वालों पर लागू होगा. इसमें किसी भी व्यक्ति का नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है.

इसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आकर भारत में बसने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता की बात कही गई है. 

CAA के लागू होने से इन तीन पड़ोसी देशों के शरणार्थियों को फायदा होगा, जिनके पास भारत में रहने के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं. 

इसमें 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ना झेलकर आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों भारतीय नागरिकता दी जाएगी. 

चार साल पहले दिसंबर 2019 में संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति से भी नागरिकता संशोधन कानून को मंजूरी मिल चुकी है.

नागरिकता संशोधन कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 10 जनवरी 2020 को ही मिल गई थी, लेकिन कोरोना के कारण इसमें देरी होती चली गई. 

CAA कानून को ऐसे लोगों के लिए बनाया गया है जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न से तंग आकर भारत में शरण लिए हुए हैं.

इस कानून का मुसलमान सबसे ज्यादा विरोध कर रहे हैं. क्योंकि तीन देशों से आए मुसलमानों को नागरिकता देने के प्रवाधान से बाहर रखा गया है. 

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान समानता की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है क्यों इसमें मुसलमानों से भेदभाव हो रहा है.

दिसंबर 2019 को संसद में पास हुआ था सीएए

सीएए को 11 दिसंबर, 2019 को संसद में पास किया गया था जिसके बाद पूरे देश में यह चर्चा और विरोध का विषय बना हुआ था. नागरिकता संशोधन कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई समुदायों से आने वाले शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का फास्ट ट्रैक रोड तैयार करता है.

इसके लिए 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन किया गया है जिसके इस्तेमाल से जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले अपने देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने की वजह से भारत में शरण लेने पहुंचे हैं उन्हें भारत की नागरिकता दी जा सकेगी.

सीएए को लेकर देशभर में हुए थे विरोध प्रदर्शन

इस कानून को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग में धरना और असम के गुवाहाटी में काफी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था, हालांकि कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए लोगों का अपना धरना वापस लेना पड़ा था. उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून को संसद में पारित हुए चार साल से ज्यादा हो गए है लेकिन इसे लागू करने में इसलिए ज्यादा वक्त लगा क्योंकि इसके नियमों और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाना था.

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