शिशु को हर 2 घंटे पर स्तनपान कराएं

शिशु को हर 2 घंटे पर स्तनपान कराएं

  • मां का दूध नवजात के लिए सर्वोत्तम आहार
  • छः माह तक सिर्फ स्तनपान, और कोई तरल पदार्थ नहीं
  • स्तनपान देता है नवजात को कई रोगों से लड़ने की क्षमता

संवाददाता प्रदीप दुबे

गाजीपुर: जिले में पोषण पखवाड़ा 16 मार्च से 31 मार्च तक चलाया जाएगा। जिसका उद्देश्य गर्भवती और नवजात शिशु को पोषण और पोषण युक्त आहार देने के बारे में समुदाय को जागरूक करना है । इसी कड़ी में नवजात को स्तनपान कराया जाना एक बेहतर पोषण के रूप में जाना जाता है। लेकिन मौजूदा समय में स्तनपान को लेकर महिलाओं में कई तरह की भ्रांतियां हैं। इसी को लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी दिलीप कुमार पांडे से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्तनपान न केवल बच्चे को संक्रमण से सामना करने में मदद करता है, बल्कि यह मां-बच्चे के आपसी संबंध को भी बढ़ाता है।

एसीएमओ और एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ के के वर्मा ने बताया कि नवजात को समय पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। नवजात को हर दो से तीन घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, इसका मतलब है कि 24 घंटों में उसे 8 से 12 बार स्तनपान कराने की आवश्यकता होती है। शिशु को जन्म के बाद पहले छः महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

शिशु को कम से कम दस मिनट के लिए स्तनपान कराएं। अपने बच्चे के होठों के पास स्तन को तब तक रखें जब तक वह मजबूती से पकड़ कर चूसने न लगे। बाल रोग विशेषज्ञ और एसीएमओ डॉ उमेश कुमार ने बताया कि शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। शिशु दूध पीते समय हवा निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में गैस हो जाती है और यह पेट के दर्द का कारण बनता है। डकार दिलाने से यह अतिरिक्त हवा को बाहर निकालता है, इस प्रकार पाचन में सहायता करता है और दूध उलटने और पेट के दर्द को भी रोकता है।

शिशु को धीरे से एक हाथ से अपने सीने से लगा लें। उसकी ठोड़ी आपके कंधे पर टिकी होनी चाहिए। अपने दूसरे हाथ से उसकी पीठ को बहुत धीरे से थपथपाएं जब तक वह डकार न ले। आप अपने बच्चे के सिर और गर्दन को एक हाथ से सहारा देेते हुए उसे पकड़ रहे हैं। इसका कारण यह है कि उसकी गर्दन की मांसपेशियां अभी तक स्वतंत्र रूप से सिर को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं हैं। रीढ़ की हड्डी अभी भी बढ़ रही है और मजबूत हो रही है।

शिशु की गर्दन केवल तीन महीने की उम्र के बाद अपने दम पर सिर का संभालने में सक्षम होगी। इसलिए नवजात शिशु की देखभाल करते समय उसके सिर और गर्दन को सहारा देने पर ध्यान दें।

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