वाराणसी/वशिष्ठ वाणी। अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केन्द्र (आईयूसीटीई), वाराणसी में आयोजित सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “द डिजिटल पेडागॉजी: एजुकेटर्स फॉर टुमॉरो (The Digital Pedagogy: Educators for Tomorrow)” के दूसरे दिन, दिनांक 16 दिसंबर 2025 को डिजिटल शिक्षण, न्यूरोप्लास्टिसिटी, भावनात्मक अधिगम और समावेशी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. दीप्ति गुप्ता, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई द्वारा “द लिविंग माइंड: इमोशंस, ग्रोथ, एंड द साइंस ऑफ लर्निंग” विषय पर सत्र से हुई। उन्होंने सीखने की प्रक्रिया में भावनाओं, न्यूरोप्लास्टिसिटी तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास पर उनके प्रभाव को रेखांकित करते हुए भावनात्मक रूप से संवेदनशील एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षण वातावरण के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यूरोप्लास्टिसिटी और जिज्ञासा पर फोकस
दूसरे सत्र में डॉ. राजा पाठक, सहायक आचार्य, आईयूसीटीई ने “वायर्ड फॉर वंडर: न्यूरोप्लास्टिसिटी, इमोशन, एंड द हार्ट ऑफ लर्निंग” विषय पर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से व्याख्यान दिया। उन्होंने मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से प्रभावी अधिगम की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा और भावनात्मक सहभागिता सीखने को गहरा और स्थायी बनाती हैं तथा शिक्षकों को इन्हें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
समावेशी डिजिटल शिक्षण पर जोर
तीसरे सत्र में प्रो. आशीष श्रीवास्तव, संकाय प्रमुख (शैक्षणिक एवं शोध), आईयूसीटीई ने “डिज़ाइनिंग फॉर एवरी माइंड: द आर्ट ऑफ इन्क्लूसिव डिजिटल लर्निंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने समावेशी डिजिटल शिक्षा की अवधारणा को रेखांकित करते हुए विविध पृष्ठभूमि के शिक्षार्थियों के लिए सुलभ, लचीले और समान अवसर प्रदान करने वाले शिक्षण डिज़ाइन पर बल दिया। साथ ही, तकनीक के माध्यम से शिक्षण को अधिक सहभागी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए।
डिजिटल शिक्षा में एसईएल की भूमिका
अंतिम सत्र में डॉ. दीप्ति गुप्ता ने “हार्ट्स इन हार्मनी: वीविंग एसईएल इंटू द डिजिटल स्टोरी” विषय पर रोचक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL) की डिजिटल शिक्षा में भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन और मानवीय संवेदनाओं को डिजिटल कहानी-वाचन से जोड़कर शिक्षण को अधिक मानवीय, प्रभावी और समग्र बनाया जा सकता है।
24 देशों के 40 शिक्षक कर रहे सहभागिता
इस अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीलंका, बेलारूस, कंबोडिया, इक्वाडोर, घाना, कजाकिस्तान, केन्या, मोरक्को, मोज़ाम्बिक, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, रूस, रवांडा, तंजानिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, इथियोपिया, ताजिकिस्तान, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, कोट द’ईवोआर और ट्रिनिडाड एवं टोबैगो सहित 24 देशों के 40 शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम के निदेशक प्रो. आशीष श्रीवास्तव हैं, जबकि समन्वयक की भूमिका डॉ. राजा पाठक निभा रहे हैं। सह-समन्वयक के रूप में डॉ. दीप्ति गुप्ता एवं डॉ. सुनील कुमार त्रिपाठी सक्रिय योगदान दे रहे हैं। केंद्र के समस्त संकाय सदस्य एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


