कोविड 19 के चलते बोर्ड की परीक्षा मई-जून में

कोविड 19 के चलते बोर्ड की परीक्षा मई-जून में

  • फीस जमा न होने पर छात्रों को चेतावनी नहीं बैठने दिया जायेगा परीक्षा में।

वरिष्ठ संवाददाता

वाराणसी: वैश्विक महामारी कोरोना ने जहां विश्व की अर्थव्यवस्था को जमींदोज कर दिया और उसका सीधा प्रभाव अब हर वर्ग व समुदाय में प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। शिक्षा, स्वास्थ व व्यवसाय के साथ ही अब भरण-पोषण की व्यवस्था करना एक चुनौती बनकर सामने आ रहा है। वहीं आपदा की इस घड़ी में निजी विद्यालयों की मनमानी से अभिभावकों में रोष उत्पन्न है। एक ओर जहां पूरे विश्व में मानवता की मिसाल पेश कर देश की जनता ने कोरोना काल मे सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का कार्य किया और कोविड के नियमों का पालन किया।

वहीं मानवीय संवेदनाओं को दृष्टिगत रखते हुए कुछ विद्यालयों ने अपने विद्यालय में छात्रों की फीस माफ करने की घोषणा की वहीं नामचीन विद्यालयों ने सरकार के निर्देशों के बाद भी किसी भी छात्र की एक माह की फीस माफ नहीं की। बल्कि कोरोना काल मे बंदी के दौरान छात्रों के परिजनों से वसूले गये फीस में विद्यालय का मेन्टेनेन्स चार्ज, बिजली बिल का चार्ज तक वसूला गया। कोढ़ में खाझ का काम तो तब हुआ जिन बच्चों की परीक्षाएं मई-जून में होनी निर्धारित है उन छात्रों पर अनावश्यक दबाव बनाकर नामचीन विद्यालय के प्रबंधकों द्वारा फरवरी माह में ही मार्च की फीस वसूली जा रही है।

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