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Mon. Apr 15th, 2024

वकीलों के भीष्म पितामह,आपातकाल में दिया ASG पद से इस्तीफा, जानें मौलिक अधिकारों के रक्षक के बारे में सबकुछ 

Fali S Nariman passes away: मौलिक अधिकारों के रक्षक कहे जाने वाले दिग्गज वकील फली एस. नरीमन का निधन हो गया है. नरीमन ने कई मामलों में अपनी छाप छोड़ी.पढ़िए उनके दशकों पुराने किस्से.

देश के दिग्गज वकील फली एस. नरीमन का निधन हो गया है. दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली. वे 95 साल के थे. परिवार के करीबियों ने बताया कि उनका निधन रात करीब 1.15 बजे हुआ. नरीमन के परिवार में उनके बेटे और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, बहू सनाया और बेटी अनाहिता हैं. उनकी पत्नी बापसी नरीमन का 2020 में निधन हो गया था. 

फली एस. नरीमन का  जन्म 10 जनवरी 1929 को म्यांमार के रंगून में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई शिमला में हुई थी. उसके बाद उनकी फैमली मुंबई शिफ्ट हो गई. नरीमन ने गवर्मेंट लॉ कॉलेज बंबई वकालत की पढ़ाई की. पढ़ाई के बाद उन्होंने 1950 से बंबई हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. उनकी प्रतिभा को जल्द ही पहचाना गया और उन्हें 1961 में वरिष्ठ वकील नामित किया गया. अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं. 

भोपाल गैस त्रासदी का केस लड़ा

नरीमन ने भोपाल गैस त्रासदी का केस लड़ा था. गैस कांड की दोषी कंपनी की तरफ से अपनी दलीलें पेश की थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने इसे अपनी भूल बताया था. नरीमन ने कहा था कि हां मुझसे गलती हुई. कानून की दुनिया में फली एस. नरीमन को न्याय के देवता के रूप में देखा जाता था. उनकी बौद्धिक, तीक्ष्णता, अटूट संकल्प और न्याय प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता उनका कानूनी करियर 70 साल से ज्यादा का था. जस्टिस फली एस नरीमन न केवल एक कानूनी विद्वान बल्कि शब्दों के बुनकर थे. 

हॉर्स ट्रेडिंग पर दिया बयान चर्चा में रहा

लंबे वक्त तक देश में सांसदों और विधायाकों की खरीद-फरोख्त होते रहे. 80 और 90 के दशक में ये मामला उठा. संविधान में संशोधन के बाद सांससों-विधायकों की खरीद-फरोख्त को हॉर्स ट्रेडिंग नाम दिया गया. फली एस नरीमन ने इसे लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सांसद-विधायकों की खरीद फरोख्त को घोड़ों से जोड़ना गलत है. घोड़े वफादार होते हैं. इंसानों की गलती के लिए हॉर्स ट्रेडिंग शब्द का इस्तेमाल करना घोडों का अपमान करने जैसा है.

आपातकाल में दिया ASG पद से इस्तीफा

फली एस. नरीमन को इंदिरा गांधी सरकार ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG)बनाया था. लेकिन उन्होंने आपातकाल की घोषणा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. नरीमन हमेशा नागरिकों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों के पैरवीकार रहे. 

कॉलेजियम प्रणाली को मजबूत किया

एस. नरीमन ने 99वें संविधान संशोधन अधिनयम के खिलाफ दलीलें दी थीं. आम तौर पर जिसे एनजेएसी एक्ट के नाम से जाना जाता है, जिसने जजों की नियुक्ति में कार्यपालिका को हस्तक्षेप का अधिकार दिया था. सुप्रीम कोर्ट में 4-1 के फैसले से यह संशोधन असंवैधानिक घोषित कर दिया था. न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को स्थापित और मजबूत किया.

वकीलों के भीष्म पितामह

फली एसं नरीमन ने कई मामलों में अपनी छाप छोड़ी. नेशनल जूडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन के मामले में भी वो चर्चा में रहे थे. उन्होंने अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर भी काम किया. फली एस. नरीमन को भारतीय न्यायप्रणाली का भीष्म पितामह कहा जाता था. कानूनी करियर 70 साल से ज्यादा का था. अपने जीवनकाल में उन्होंने कई बड़े केस लड़े. देश ने उन्हें 1991 में पद्म भूषण और 2007 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया. वह 1999 से 2005 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे. 

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