संभल जाइए वरना हालात इससे भी बुरे हो जाएंगे

संभल जाइए वरना हालात इससे भी बुरे हो जाएंगे

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लेखक
राजेश माहेश्वरी

देश में कोरोना की कहर दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। लोगों की लापरवाही खतरे की घंटी से कम नहीं है। लोग लापरवाही की सरहद को लांघ रहे हैं। पिछले दिनों ही एक ऐसा मामला दिल्ली में देखने को मिला। जहां एक दम्पत्ति ने बिना पुलिस के रोकने पर पुलिसकर्मियों से बदतमीजी की। दम्पत्ति को पुलिस ने इसलिए पकड़ा था, क्योंकि उन्होंने ने मास्क नहीं लगाया था। देखा जाए तो एक ओर हम सरकार को व्यवस्था पर अपनी खीझ और गुस्सा निकालने से बाज नहीं आते हैं। वहीं दूसरी ओर हमारा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पूरे समाज के लिए खतरे का कारण बन सकता है।

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वास्तव में कोरोना के प्रकोप के सामने सारी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं। ये होना स्वाभाविक भी है। 135 करोड़ की आबादी वाले देश में किसी महामारी से निपटना कोई सरल काम नहीं कहा जा सकता। पहली लहर से तो हमने मिलकर मजबूती से लड़ लिया था, लेकिन दूसरी लहर ने सारे दावों और हकीकतों को बेपर्दा कर डाला है। सरकारी व्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों को ये भी समझा रही है कि वो मास्क लगाए, दो गज की दूरी रखे और समय-समय पर हाथ धोए। अब इससे शर्मनाक किसी ओर देश के लिए और क्या हो सकता है कि सरकार को मास्क लगाने के लिए जन जागरूकरता कार्यक्रम चलाना पड़ रहा है। मास्क न पहनने पर दण्डात्मक कार्रवाई करनी पड़ रही है। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है जब अमेरिका जैसा अति विकसित देश कोरोना के सामने घुटनों पर आ गया तो फिर भारत जैसे विकासशील देश के बारे में क्या कहा जाए।

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जनवरी में टीकाकरण अभियान की शुरूआत के बाद देशवासियों ने समझ लिया कि अब कोरोना हमारा कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा। मार्च का महीना आते-आते हमने सोच लिया कि कोरोना तो चला गया है। हमने मास्क नहीं पहने, सुरक्षित दूरी नहीं बनायी, हमारी सामाजिक सक्रियता बढ़ी और दफ्तर सामान्य ढंग से चलने लगे। अप्रैल के पहले सप्ताह में संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख पार करने लगा जो संकेत था कि दूसरी लहर घातक है और इसका पीक ऊपर जायेगा। ऐसे में जहां बदले विषाणु का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है, वहीं बचाव की सामाजिक जवाबदेही भी जरूरी है।

कोरोना वायरस

प्रसिद्ध मेडिकल शोध-पत्रिका ‘द लैंसेट’ ने एक विश्लेषण प्रकाशित किया है, जिसका निष्कर्ष है कि कोविड-19 का संक्रमण हवा के माध्यम से बड़ी तीव्रता से प्रसारित होकर दूर तक संक्रमित करने की क्षमता रखता है। डॉपलेट्स से उतनी तेजी से संक्रमण नहीं फैलता। उस थ्योरी को खारिज कर दिया गया है। ‘लैंसेट’ का विश्लेषण ब्रिटेन, कनाडा और अमरीका के छह विशेषज्ञों ने किया है। ऐसा ही शोधात्मक अध्ययन जुलाई, 2020 में 200 से अधिक विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को लिखकर भेजा था कि कोरोना संक्रमण हवा से भी फैलता है। ‘लैंसेट’ में भारत में व्यापक रूप से फैल रहे कोरोना संक्रमण की बुनियादी वजह भी हवा बताई गई है। रपट में कहा गया है कि 10 से ज्यादा लोग एक स्थान पर लंबी देर के लिए इकट्ठा न हों। यानी मेले, रैलियां, चुनाव, बंद कमरों में बसने की मजबूरी आदि ऐसे बुनियादी कारण हैं, जो संक्रमण फैला रहे हैं। रपट में चेतावनी दी गई है कि कमोबेश 2 महीने तक भीड़ और जमावड़ों से एहतियात बरतें। जिन इलाकों में संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, उन पर ही कड़ी बंदिशें लगाई जाएं। पूर्ण लॉकडाउन की जरूरत नहीं है।

‘द लैंसेट’ की रपट प्रकाशित होने के बाद प्रमुख चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की टिप्पणियों का सार यह है कि भारत में कोरोना संक्रमण की मौजूदा लहर अभी लंबी चलेगी। इसका ढलान कब शुरू होगा, फिलहाल अनुमान लगाना असंभव-सा है, लेकिन संक्रमण की तीसरी लहर भी आएगी और इतनी ही भयावह हो सकती है। फिलहाल भारत में संक्रमित मरीजों की संख्या 2.60 लाख से ज्यादा और मौतें करीब 1500 हो चुकी हैं। मौतें सितंबर, 2020 के पिछले ‘चरम’ से भी बेहद ज्यादा हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि ये आंकड़े 14 दिन पहले के संक्रमण के हैं, लिहाजा नई संक्रमित संख्या इससे काफी अधिक है।

ऐसा भी नहीं है कि कोरोना की पहली लहर के दौरान देश भर में जो लॉकडाउन लगाया गया था, उसके दौरान सरकार और निजी क्षेत्र के स्तर पर, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की, कोशिश नहीं की गई। हम पीपीई किट्स, वेंटिलेटर और मास्क के क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हुए। हमने कोरोना के दो टीके बनाने और उनके उत्पादन में कामयाबी हासिल की और करीब 12 करोड़ नागरिकों को टीके की खुराकें भी दी जा चुकी हैं। लेकिन इन कोशिशों के बावजूद कई विसंगतियां सामने आई हैं। सिर्फ वेंटिलेटर की ही बात करें, तो 50,000 वेंटिलेटर बनाने के ऑर्डर ज्यादातर उन कंपनियों को दिए गए, जिनके पास बुनियादी ढांचा ही नहीं था।

कोरोना की दूसरी लहर से देश के कई राज्यों में हालात गंभीर हो रहे हैं। हालात इतने खराब हो रहे हैं कि लॉकडाउन लगाने की नौबत आ रही है। स्कूल और कॉलेज तो पहले ही बंद कर दिये गये थे, अब तो कई शहरों में भी वीकेंड कफ्र्यू और नाइट कफ्र्यू लगा दिया गया है। हम लोगों को यह पता होना चाहिए कि विश्व के कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर भी आई है। बीते मार्च में फ्रांस में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की वजह से राजधानी पेरिस में एक महीने का लॉकडाउन लगाया गया था।

पिछले साल जब देश में कोरोना ने दस्तक दी थी, तब सरकार, प्रशासन और आम लोग भी इस वैश्विक महामारी के प्रति बहुत ही गंभीर थे। लेकिन अब जब फिर से कोरोना तेजी से सक्रिय हो रहा है तो सरकार, प्रशासन और आम लोग कुछ खास सतर्क नहीं दिख रहे। हालांकि, वैज्ञानिकों की मेहनत की बदौलत वैक्सीन भी तैयार हो गई है और लोग आगे आ रहे हैं। लेकिन यह महामारी हमारे देश में पूरी तरह हारी नहीं है। देश के जिन राज्यों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं वहां तो सबसे पहले और युद्धस्तर पर कोरोना का टीकाकरण होना चाहिए। लोग कोरोना से बचाव के सारे नियम व सावधानियां भूल गये। अगर महामारी की दूसरी लहर से मुकाबला करना है तो राज्य सरकारों को कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से लोगों से पालन करवाना होगा अन्यथा इसका खमियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।

सरकार के साथ-साथ ये हम सब की भी जिम्मेदारी बनती है कि हम कोरोना से बचने के लिए अपने व्यवहार, कार्यकलाप, आचरण और चरित्र में परिवर्तन लाएं। वरना ये जान लीजिए किसी भी महामारी के सामने बड़ी से बड़ी सरकारें और व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाती हैं। अमेरिका का उदाहरण हम सबके सामने है। जरूरत सरकारी तथा गैर-सरकारी अस्पतालों में कोरोना सहयोगी कर्मियों की सुविधाओं में वृद्धि करने की है। लोगों को अविलंब वैक्सीन लगवानी होगी। अर्थव्यवस्था की चिंता छोड़ जन-सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी ताकि इस नाजुक दौर का मुकाबला करने में सक्षम हो सकें। हमारी सतर्कता खुद को ही नहीं, बल्कि हमारे अपनों को भी सुरक्षित रखने में सहायक होगी। इसलिए सरकार की गाइडलाइंस का पालन अवश्य करें। इस भयावह दौर का मुकाबला सकारात्मकता से करना होगा।

-लेखक राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।

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