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Tue. Apr 16th, 2024

Badaun Encounter: बदायूं हत्याकांड पर परेशान दो परिवार,आरोपी के परिवार को भी सवाल के जवाब की तलाश

Badaun double murder case update: बदायूं हत्याकांड पर दो परिवार एक ही सवाल से परेशान हैं. पीड़ित और आरोपी परिवार को अब तक ये नहीं पता चल पाया है कि आखिर वो वजह क्या थी, जिसके चलते इतने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया? ये सवाल पुलिस और पड़ोसियों के भी मन में है, जिसका जवाब तलाशा जा रहा है. पीड़ित परिवार के घर के बाहर मौजूद लोग गुमसुम, खामोश बैठे जरूर दिख रहे हैं, लेकिन जब वे बोलते हैं, तो एक ही सवाल पूछते हैं कि आखिर मासूम बच्चों ने जावेद (फरार) और साजिद (एनकाउंटर में मारा गया) का क्या बिगाड़ा था?

डबल मर्डर के शिकार आयुष और अहान के पिता पेशे से ठेकेदार विनोद कुमार ने पुलिस से अपील की है कि फरार जावेद का एनकाउंटर नहीं होना चाहिए. उसे जिंदा पकड़ा जाना चाहिए, ताकि इस सवाल का जवाब पता चल सके कि आखिर उन्होंने मेरे मासूम बच्चों का कत्ल क्यों किया? वजह क्या थी? इसका पता चलने के बाद पुलिस चाहे जो भी करे.

मंगलवार शाम करीब 7 बजे बदायूं SSP ऑफिस से करीब 500 मीटर दूर बाबा कॉलोनी में रहने वाले विनोद और संगीता के दो बेटों आयुष प्रताप (13) और अहान प्रताप (6) की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई. आरोप, पेशे से नाई साजिद और उसका भाई जावेद पर है. पुलिस ने कहा कि उन्होंने 2 घंटे बाद एक मुठभेड़ में 30 साल के साजिद को मार डाला और उसका भाई जावेद फरार है. जावेद पर भी इस मामले में शामिल होने का आरोप है.

वारदात के शिकार बच्चों के पिता विनोद कुमार ने और क्या कहा?

बुधवार को, विनोद कुमार वारदात के बाद खुद भी उबरने की कोशिश करते दिखे. साथ ही पत्नी संगीता को संभालते दिखे. उन्होंने कहा कि पुलिस को फरार दूसरे व्यक्ति (जावेद) का एनकाउंटर नहीं करना चाहिए. उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए और पूछा जाना चाहिए कि उसने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? मेरा परिवार क्यों? कारण क्या था? इसके बाद पुलिस जो चाहे कर सकती है. उन छोटे बच्चों ने क्या बिगाड़ा था? बच्चे तो बस खेलना-कूदना और स्कूल जाना जानते हैं… मैं असहाय हूं, मैं कुछ नहीं कर सकता, मैं बस जो हुआ है उससे उबरने की कोशिश कर रहा हूं.

बुधवार को ही दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कर घर लौटे 42 साल के विनोद कुमार काफी गमगीन दिखे, लेकिन खुद को संभालते हुए कहा कि मेरी, आरोपियों के परिवार से कोई दुश्मनी नहीं थी. मूल रूप से लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले ठेकेदार विनोद कुमार ने कहा कि मंगलवार को भी अन्य दिनों की तरह मैं व्यस्त था. मैं सुबह बच्चों से बात नहीं कर सका, इसलिए बच्चों ने दोपहर में लगभग 1 बजे मुझे फोन किया. अहान (वारदात का शिकार छोटा बेटा) बहुत खुश था. उसने कहा, ‘पापा, मैंने कपड़े और जूते खरीदे हैं.’ मैं उनसे बाद में बात करना चाहता था. लेकिन मुझे क्या पता था कि मोबाइल पर आखिरी बार बात हो रही है.

बच्चों की दादी बोली- वारदात के बाद गेट बंद किया और शोर मचाया

वारदात की शिकार दोनों बच्चों की दादी 65 साल की मुन्नी देवी ने कहा कि साजिद उनके घर पैसे मांगने आया था. उसने कहा कि मेडिकल खर्च के लिए 5000 रुपये की जरूरत है ताकि वो अपनी प्रेग्नेंट पत्नी को अस्पताल ले जा सके. हमने उसे पैसे दे दिये. मेरी बहू ने जाने से पहले उससे चाय पीने को कहा और रसोई में चली गयी. इसी बीच साजिद, आयुष को संगीता का पार्लर देखने के बहाने ऊपर ले गया. वो उसे छत पर ले गया और उसकी हत्या कर दी. बाद में जब अहान पानी का गिलास लेकर पहुंचा तो उसने उसे भी मार डाला. दूसरा बेटा पीयूष ने साजिद को अपने भाइयों पर हमला करते हुए देखा था. साजिद ने उसे भी पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह भागने में सफल रहा.

मुन्नी देवी ने कहा कि वारदात के बाद उन्होंने और उनकी बहू (संगीता) ने तुरंत गेट बंद कर दिया, शोर मचाया और पुलिस को वारदात की जानकारी दी. चूंकि मेरा घर पुलिस चौकी सिर्फ 200 मीटर दूर है, पुलिस तुरंत पहुंची और हमलावर को पकड़ लिया. जावेद बाहर बाइक पर खड़ा था, वो मौके से भाग गया. मुन्नी देवी ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या हमने किसी व्यक्ति की मदद करके कुछ गलत किया? कॉलोनी के सभी लोग उसकी (साजिद) दुकान से बाल कटवाते थे. वे दोनों (आयुष और अहान) उसे भैया कहकर बुलाते थे और बाल कटवाते थे. वह उन बच्चों के साथ ऐसा कुछ कैसे कर सकता है.  उन्होंने मांग की कि दूसरे आरोपी जावेद को जल्द पकड़ा जाए, ताकि वारदात के पीछे के मकसद के बारे में जानकारी मिल पाए.

आरोपी के परिवार को भी सवाल के जवाब की तलाश

पीड़ित परिवार के अलावा, आरोपियों के परिवार को भी इस सवाल के जवाब कि तलाश है कि आखिर वारदात को क्यों अंजाम दिया गया. पीड़ित के परिवार के घर से 14 किलोमीटर दूर सखानू गांव में रहने वाले साजिद की मां नाजरीन ने कहा कि किसी ने फोन करके उसे मामले में फंसा दिया है. उस परिवार से हमारे बहुत अच्छे संबंध थे. साजिद करीब 12 साल से वहां नाई की दुकान चला रहा था. साजिद त्योहारों पर विनोद और संगीता के घर जाता थे और खाना भी खाता था. जब पुलिस ने उसे पकड़ा, तो कम से कम ये पूछना चाहिए था कि उसने ऐसा क्यों किया?

नाज़रीन ने कहा कि मैं साजिद को करीब 9 साल तक दरगाह ले जाती थी क्योंकि वो मानसिक रूप से ठीक नहीं था. जब उसकी हालत में सुधार हुआ और वो शांत हो गया, तो मैं उसे दरगाह से वापस घर ले आई. उसके बाद मैंने उसकी शादी करा दी. उसके दो बच्चे थे. नाज़रीन ने कहा कि मेरा छोटा बेटा जावेद, साजिद के साथ नहीं गया था. 

उधर, एसएसपी बदायूं आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 452 (चोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में अतिक्रमण), 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था सामान्य है. शहर में कोई समस्या नहीं है. हर जगह तैनाती कर दी गई है. घटना के बाद साजिद भाग गया था, लोगों ने उसे पकड़ने की कोशिश की. पुलिस ने घेराबंदी की और जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई. परिवार की ओर से दी गई शिकायत में जावेद का भी नाम दिया गया है. हम उसकी तलाश कर रहे हैं. आरोपी का अभी तक कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिला है. मकसद का पता लगाया जा रहा है.

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