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Mon. Apr 15th, 2024

रूस में भारतीयों को यूक्रेन से जंग लगने किया जा रहा मजबूर, असदुद्दीन ओवैसी ने किया दावा

Owaisi Appeal To Jaishankar: हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रूस में ‘फंसे’ भारतीयों के रेस्क्यू के लिए विदेश मंत्री जयशंकर से अपील की है. AIMIM सांसद का दावा है कि रूस में फंसे 3 भारतीयों को यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

AIMIM के चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है. ओवैसी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तीन भारतीयों को कथित तौर पर एक एजेंट ने धोखा दिया और उन्हें सेना सुरक्षा सहायक (Army security helpers) के रूप में काम करने के लिए रूस भेज दिया. अब उन्हें रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ने को मजबूर किया जा रहा है. ओवैसी ने आज यानी बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक चिट्ठी लिखी. उन्होंने जयशंकर से अपील की कि तीनों भारतीयों का जल्द रेस्क्यू किया जाए.

ओवैसी ने ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत के तीन नागरिकों को एक एजेंट ने धोखा दिया और उन्हें सेना के सुरक्षा के मदद के रूप में काम के लिए रूस भेजा. ये तीनों भारतीयों में से एक-एक उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर विदेश मंत्री जयशंकर को टैग करते हुए ओवैसी ने लिखा- कृपया इन लोगों को घर वापस लाने की कोशिश की जाए. उनकी जान खतरे में है और उनके परिवार चिंतित हैं. रूस और यूक्रेन के बीच जंग को अब तक दो साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है. 

आखिर कैसे सामने आया मामला?

ये मामला तब सामने आया जब हैदराबाद के एक पीड़ित के परिवार के सदस्य ने ओवैसी से संपर्क किया. पिछले महीने, हैदराबाद के सांसद ने जयशंकर और मॉस्को में भारतीय दूतावास को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी. ओवेसी ने पत्र में कहा कि उन्होंने 25 दिनों से अपने परिवारों से संपर्क नहीं किया है. उनके परिवार उनके बारे में बहुत चिंतित हैं और उन्हें भारत वापस लाने का इरादा रखते हैं, क्योंकि वे अपने परिवार में कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं.

पीड़ितों में से एक लगभग 20 वर्ष का है, उसने द हिंदू को बताया कि वे तीनों फैसल खान नाम के एक एजेंट के माध्यम से रूस आए थे, जो ‘बाबा व्लॉग्स’ नाम का एक यूट्यूब चैनल चलाता है. कथित तौर पर पीड़ितों को सहायक के रूप में तैनात करने का वादा किया गया था. पीड़ितों ने कहा कि उन्हें ‘रूसी सेना’ की ओर से हथियार और गोला-बारूद संभालने की ट्रेनिंग दी गई थी और रूस-यूक्रेन सीमा पर रोस्तोव-ऑन-डॉन में बंदूक की नोक पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया था.

पीड़ित शख्स ने और क्या बताया?

पीड़ित ने बताया कि हम नवंबर 2023 में यहां पहुंचे और हमसे कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कराए गए, जिसमें कहा गया था कि हमें सेना सुरक्षा सहायकों के रूप में काम पर रखा जा रहा है. हमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि हमें युद्ध के मैदान में नहीं भेजा जाएगा और हर महीने 1.95 लाख रुपये वेतन और 50,000 रुपये अतिरिक्त बोनस का वादा किया गया था. दो महीने के लिए 50,000 रुपये के बोनस के अलावा, मुझे कोई पैसा नहीं मिला है.

उन्होंने आगे कहा कि जब उन्होंने भागने की कोशिश की तो उन्हें पकड़ लिया गया और बंदूक की नोक पर धमकाया गया. हालांकि, वो 22 जनवरी को भागने में सफल रहा, लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पीड़ित ने कहा कि मॉस्को में भारतीय दूतावास से बार-बार की गई गुहार अनसुनी कर दी गई. मुझे कई बार लौटा दिया गया. मेरे पास न तो उचित दस्तावेज़ हैं और न ही पैसे, सरकार हमारी मदद नहीं कर रही है.

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