माहवारी नौ से 13 वर्ष की लड़कियों में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया

संवाददता प्रदीप दुबे

गाजीपुर

महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान कई तरह की चुनौतियों व समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति सजग और जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 28 मई को विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है ताकि उन्हें झिझक छोड़ने और इस बारे में खुलकर बात रखने का मौका मिल सके | 
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ के के वर्मा ने बताया – इस दिवस का उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म संबंधी गलत अवधारणाओं को दूर करना और महिलाओं व किशोरियों को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में सही जानकारी देना है। 28 मई की तारीख निर्धारित करने के पीछे मकसद है कि मई वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह अमूमन प्रत्येक 28 दिनों के पश्चात होने वाले स्त्री के पांच दिनों के मासिक चक्र का परिचायक है।
 डॉ वर्मा ने कहा – हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जिसमें हर महिला चाहे वह किशोरी ही क्यों न हो समय पर अपनी निजता, सुरक्षा एवं गरिमा के साथ इस विषय पर खुल कर बात कर सकें । उन्होने बताया – इस दिवस को मनाने के पीछे मुख्य कारण है कि लड़कियां और महिलाएं मासिक धर्म को लेकर जागरूक होने के साथ ही इस विषय पर खुलकर अपनी बात रखें। मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहें, जिससे उन्हें किसी भी तरह के घातक संक्रमण का शिकार न होना पड़े। पिछली वर्ष की भातिं इस बार भी कोविड 19 के कारण महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के प्रति फैली भ्रांतियों के बारे में प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जागरूक किया गया |
  शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाथीखाना की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ ईशानी बर्धन का कहना है कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं। यहां इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है। वह कहती हैं कि घर में बच्चियों की मां भी इस बारे में अपनी सोच बदलें। इस बारे में बेटियों को ठीक से बताएं, ताकि बेटियों को किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े।

क्या है माहवारी
माहवारी 9 से 13 वर्ष के दौरान लड़कियों के शरीर में शुरू होने वाली एक सामान्य हार्मोनल प्रक्रिया है। इसके फलस्वरूप शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। यह प्राकृतिक प्रक्रिया सभी लड़कियों में किशोरावस्था के अंतिम चरण से शुरू होकर (रजस्वला) उनके संपूर्ण प्रजनन काल (रजोनिवृत्ति पूर्व) तक जारी रहती है। आज भी बहुत सी किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं। महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है।
क्या कहती है माहवारी प्रबंधन पर एनेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) 2015-16 की रिपोर्ट –
• रिपोर्ट के अनुसार देश में 58 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं। प्रदेश में यह आंकड़ा 47 प्रतिशत है।
• महिलाओं की कुल जनसंख्या का 75 प्रतिशत हिस्सा आज भी गांवों में है। इनमें से देश में 48 प्रतिशत व प्रदेश में 40 प्रतिशत महिलाएं ही माहवारी प्रबंधन के लिए स्वच्छ साधन का उपयोग करती हैं।
• 44 प्रतिशत महिलाएं यह कहती हैं कि वह अपनी माहवारी प्रबंधन की सामग्री को धोकर पुन: उपयोग करती हैं।

इन बातों का रखें ख्याल –
घर में रखे पुराने गंदे कपड़े का प्रयोग न करें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
छः घंटे के अंतराल पर सैनिटरी नैपकिन बदलना चाहिए।
समय-समय पर गुप्त अंगों की सफाई करती रहें।
पीरियड्स के समय कई बार शरीर में दर्द होता है। इसलिए गर्म पानी से नहाएं।
अपने बिस्तर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर बेडशीट बदलती रहें।
अगर यात्रा पर हैं और शौचालय जाना हो तो सफाई वाली जगह पर जाएं।
खान-पान का रखें ख्याल। सुपाच्य आहार का सेवन करें।

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