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लोकसभा में राहुल गांधी क्या पढ़ना चाहते थे, जिस पर मचा हंगामा

नई दिल्ली। सोमवार को लोकसभा में उस समय तीखा हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रख रहे थे। विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब राहुल गांधी ने एक पत्रिका में प्रकाशित सामग्री का हवाला देते हुए कुछ अंश पढ़ने शुरू किए।

जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी जिन अंशों का उल्लेख कर रहे थे, वे भारतीय सेना के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे की एक प्रस्तावित किताब से जुड़े बताए गए। यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन उससे संबंधित कुछ सामग्री एक पत्रिका में प्रकाशित होने की बात सामने आई थी।

सत्ता पक्ष ने जताई आपत्ति

राहुल गांधी द्वारा इन अंशों को पढ़े जाने पर सत्तापक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर कड़ा विरोध जताया। उस समय लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

सत्तापक्ष का तर्क था कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह अभी प्रकाशित नहीं हुई है। ऐसे में उसके कथित अंशों को संसद के पटल पर पढ़ना उचित नहीं है, खासकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों से जुड़ा हो।

रक्षा मंत्री का बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित किताब प्रकाशित हुई है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि किताब आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुकी है, तो उसके संदर्भ पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो उसका उल्लेख करना संसदीय प्रक्रिया और मर्यादा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

विपक्ष का पक्ष

विपक्ष की ओर से यह कहा गया कि राहुल गांधी ने कोई गोपनीय दस्तावेज या अप्रमाणित सूचना प्रस्तुत नहीं की, बल्कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री का हवाला दिया। कांग्रेस सांसदों का कहना था कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सवाल उठाना संसद का अधिकार है।

सदन में बाधित हुई कार्यवाही

दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के कारण लोकसभा में कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित रही। शोर-शराबे और विरोध के बीच अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

राजनीतिक संदेश

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया। एक ओर विपक्ष जवाबदेही और चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों को राजनीतिक बहस से दूर रखने पर जोर दे रहा है।

फिलहाल, यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर संसद के भीतर और बाहर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है।

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